16वें वित्त आयोग की राशि से पहले पुराने फंड का निस्तारण जरूरी, 15 सितंबर को जयपुर में अधिकारियों की समीक्षा बैठक
जयपुर। प्रदेश की ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के लिए उपलब्ध कराई गई पुरानी राशि के उपयोग को लेकर पंचायती राज विभाग ने सख्ती शुरू कर दी है। 16वें वित्त आयोग के तहत मिलने वाली नई अनुदान राशि की प्रक्रिया से पहले ग्राम पंचायतों के खातों में पड़ी पुरानी अप्रयुक्त राशि का निस्तारण करने के निर्देश दिए गए हैं।
विभाग की ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर उपलब्ध वित्तीय वर्ष 2026-27 की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश की ग्राम पंचायतों के खातों में करीब 12 करोड़ 35 लाख 99 हजार 337 रुपए की राशि अभी भी अप्रयुक्त पड़ी है। विभाग ने संबंधित अधिकारियों को इस राशि के उपयोग और खातों के निस्तारण की प्रक्रिया जल्द पूरी करने को कहा है।
15 सितंबर को होगी समीक्षा
पुरानी राशि, पंचायतों के खातों और वित्त आयोग से जुड़े लंबित कार्यों की समीक्षा के लिए 15 सितंबर को जयपुर स्थित विभागीय मुख्यालय में बैठक आयोजित की गई। वित्तीय सलाहकार की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में जिला परिषदों के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और विकास अधिकारी शामिल होंगे।
विभाग के निर्देशों के अनुसार विकास अधिकारियों को अपनी अधीनस्थ ग्राम पंचायतों के ग्राम विकास अधिकारियों के साथ पंचायत समिति मुख्यालय पर उपस्थित रहकर लंबित मामलों की समीक्षा करनी होगी।
राज्य वित्त आयोग की सूचनाएं अपलोड करने पर भी जोर
बैठक में सप्तम राज्य वित्त आयोग के पोर्टल पर प्रश्नावलियों और आवश्यक सूचनाओं को अपलोड करने की प्रगति की भी समीक्षा की जाएगी। विभाग ने काम में देरी करने वाले अधिकारियों से जवाब मांगे जाने और तय समय सीमा में कार्य पूरा नहीं होने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की बात कही है।
झुंझुनूं में सबसे ज्यादा अप्रयुक्त राशि
रिपोर्ट के मुताबिक पुराने फंड की अप्रयुक्त राशि के मामले में झुंझुनूं सबसे ऊपर है। यहां ग्राम पंचायतों के खातों में करीब 94.19 लाख रुपए की राशि बची हुई है। इसके बाद करौली में 92.09 लाख रुपए और सवाई माधोपुर में करीब 80.13 लाख रुपए की अप्रयुक्त राशि दर्ज है।
इन जिलों में शून्य हुआ बैलेंस
वहीं अजमेर, बारां, बूंदी, धौलपुर और जैसलमेर सहित कुछ जिलों में पुरानी राशि का उपयोग कर संबंधित खातों का बैलेंस शून्य किया जा चुका है। विभाग का फोकस अब उन पंचायतों और जिलों पर है, जहां पुरानी राशि अभी भी अप्रयुक्त पड़ी है।