शाहपुरा में गरजे बुलडोजर: 18 साल बाद वक्फ विवाद पर कोर्ट का बड़ा फैसला।

सुल्तान शाह बावड़ी विवाद का पटाक्षेप।
शाहपुरा में लगा अघोषित ‘लॉकडाउन’, 17 थानों की पुलिस और ड्रोन की निगरानी।
वक्फ ट्रिब्यूनल के फैसले के बाद पालिका एक्शन में। दशकों से हो रहे अतिक्रमण पर चलाया पीला पंजा चला तो थम गई शहर की रफ्तार।
शाहपुरा, 2 जुलाई। शाहपुरा के पुराने बस स्टैंड स्थित सुल्तान शाह की बावड़ी से जुड़े करीब 18 साल पुराने खिताबी कानूनी विवाद पर आखिरकार पटाक्षेप हो गया है। राजस्थान वक्फ अधिकरण (ट्रायब्यूनल) के एक अहम फैसले के बाद, जिला मजिस्ट्रेट भीलवाड़ा के निर्देशों की अनुपालना में गुरुवार को प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। शाहपुरा नगरपालिका प्रशासन ने उपखंड और पुलिस महकमे के साथ मिलकर खसरा संख्या 2354 की 1 बीघा 10 बिस्वा बेशकीमती सरकारी भूमि को पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त करा लिया। संवेदनशीलता को देखते हुए क्षेत्र में तीन बुलडोजर और लोडर्स ने अवैध निर्माणों को जमींदोज कर दिया।
क्या है 18 साल पुराना पूरा मामला?:- वर्ष 2008 में शाहपुरा निवासी सिद्दीक खां, इशाक मोहम्मद और मजीद खां ने नगरपालिका, राज्य सरकार (जिला कलेक्टर), उपखंड अधिकारी, तहसीलदार और राजस्थान बोर्ड ऑफ मुस्लिम वक्फ को पक्षकार बनाते हुए वक्फ अधिकरण में एक वाद दायर किया था। वादी पक्ष का दावा था कि इस स्थान पर मौजूद 1 बीघा 10 बिस्वा भूमि वक्फ संपत्ति है।
लगभग 18 वर्षों तक चली लंबी कानूनी लड़ाई और गहन सुनवाई के बाद, अधिकरण ने इस भारी-भरकम दावे को खारिज कर दिया। कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि
सुल्तान शाह की बावड़ी का वास्तविक क्षेत्रफल मात्र 9 गुणा 22 फीट (कुल 198 वर्ग फीट) ही है।
इस चिन्हित हिस्से के अलावा शेष बची पूरी भूमि पर वक्फ का कोई अधिकार नहीं है। कोर्ट ने डिक्री आदेश में यह भी साफ किया कि इस 198 वर्ग फीट की वक्फ संपत्ति के उपयोग और धार्मिक कार्यों में कोई बाधा न आए, तथा बावड़ी के रास्ते को बाधित न किया जाए।
करोड़ों की भूमि पर तने थे गोदाम और केबिने, धार्मिक स्थल भी हटाया:- अदालत के इस फैसले के बाद प्रशासन ने सरकारी जमीन को कब्जे में लेने की रूपरेखा तैयार की। इस बेशकीमती जमीन पर अतिक्रमणकारियों ने अवैध रूप से गोदाम, केबिन और घुमटियां खड़ी कर रखी थीं। गुरुवार सुबह एक दर्जन ट्रैक्टर, एक लोडर और तीन बुलडोजर (पीला पंजा) के साथ पहुंचे दस्ते ने देखते ही देखते अवैध निर्माणों को मलबे में तब्दील कर दिया। “कार्रवाई के दायरे में आ रहे एक धार्मिक स्थल को भी पूरी संवेदनशीलता के साथ वहां से हटा दिया गया।”
छावनी में बदला शाहपुरा, अघोषित ‘लॉकडाउन’ जैसे रहे हालात:- मामला अत्यधिक संवेदनशील और धार्मिक स्थल से जुड़ा होने के कारण उपखंड प्रशासन ने एक दिन पहले ही शाहपुरा के व्यापारियों और आमजन को सतर्क कर दिया था। गुरुवार को पूरे कस्बे में अघोषित लॉकडाउन जैसी स्थिति नजर आई।
चप्पे-चप्पे पर पहरा: बाजार पूरी तरह बंद रहे, सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा और चाय की थड़ियां तक बंद रहीं।
यातायात डायवर्ट: अतिक्रमण क्षेत्र की ओर आने वाले सभी रास्तों को बैरिकेड्स लगाकर पूरी तरह सील कर दिया गया और ट्रैफिक को दूसरे रास्तों पर मोड़ा गया।
हाईटेक निगरानी: सुरक्षा के मद्देनजर पूरे इलाके पर ड्रोन कैमरों से पैनी नजर रखी गई, साथ ही आसपास के मकानों की छतों पर हथियारबंद पुलिस जवान तैनात रहे। इस मौके पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राजेश आर्य, उपखंड अधिकारी सुनील मीणा, तहसीलदार भीवराव परिहार आदि अधिकारी, पालिकर्मी, गिरदावर, पटवारी, 2 दर्जन से अधिक सफाईकर्मी उपस्थित थे। अंत में पालिका ने मुक्त करवाई सरकारी भूमि पर खम्बे रोप कर तारबंदी कर दी।
संविधान के साथ निकले मुस्लिम समाज के लोग: पुलिस प्रशासन ने की समझाइश:- कार्रवाही से पूर्व शहर काजी शराफत अली, सदर हमीद खां की अगुवाई में मुस्लिम समाज के लोग बड़ी संख्या में हाथ में भारत के संविधान की प्रति लेकर सड़कों पर निकले। रास्ते में डिप्टी ओम प्रकाश विश्नोई, थानाधिकारी सुरेश चंद्र ने समझाइश कर लोगों को प्रतिबंधित क्षेत्र की ओर जाने से रोका। बाद में एक प्रतिनिधि दल उपखंड अधिकारी सुनील मीणा, एसएसपी राजेश आर्य के पास पहुंचा। जहां लोगों ने आरोप लगाया कि आपने (प्रशासन) ने सुप्रीम व हाई कोर्ट की गाइड लाइन की पालना नहीं की। हमारा पक्ष सुनने का 15 दिन का समय नहीं देकर 24 घंटे में कार्रवाही को अंजाम देकर 3 पक्की मजार पर रखी चादर आदि सामग्री को हमारे को सुपुर्द किए बिना हटा डाली। वहां भी अधिकारियों ने कोर्ट के फैसले के तहत कार्रवाही का हवाला देते हुए समझाइश कर लोगों को हटाया।
इनका कहना था:
नगरपालिका की जमीन से अतिक्रमण हटाने की यह बड़ी कार्रवाई कोर्ट के आदेश पर की गई है। मौके पर धार्मिक स्थल होने के कारण सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। एहतियात के तौर पर स्थानीय पुलिस के अलावा जिले के 17 थानों से करीब 200 पुलिसकर्मियों का अतिरिक्त जाप्ता तैनात किया गया था। शाहपुरा की जनता के सहयोग से पूरी कार्रवाई कानून व्यवस्था और शांति के साथ संपन्न हुई।
— राजेश आर्य, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, शाहपुरा

