ओबीसी आरक्षण पर आज बड़ा फैसला, 2500 सरपंच व 1750 पार्षद पद हो सकते हैं आरक्षित
जयपुर। राजस्थान में लंबे समय से लंबित निकाय एवं पंचायत चुनावों का रास्ता अब लगभग साफ हो गया है। ओबीसी राजनीतिक प्रतिनिधित्व आयोग बुधवार को अपनी बहुप्रतीक्षित रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगा। इसी रिपोर्ट के आधार पर प्रदेशभर में पंचायतों और नगरीय निकायों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए आरक्षित सीटों का निर्धारण किया जाएगा तथा जिलेवार आरक्षण की लॉटरी निकाली जाएगी। सरकार को 15 अगस्त तक आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया पूरी करनी है।आयोग ने अपनी रिपोर्ट में प्रदेश की अनुमानित ओबीसी आबादी 45 प्रतिशत से अधिक मानते हुए बड़ी संख्या में पंचायत और निकाय सीटों को आरक्षित करने का प्रस्ताव तैयार किया है। सूत्रों के अनुसार प्रदेश की 14,403 ग्राम पंचायतों में लगभग 2,500 सरपंच पद, जबकि 309 नगरीय निकायों के 10,245 वार्डों में करीब 1,750 पार्षद पद ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित किए जा सकते हैं। इसके अलावा पंचायत समितियों में 75 से 80 प्रधान पदों के आरक्षित होने की भी संभावना है।आयोग ने पूर्व में हुए पंचायत एवं निकाय चुनावों के आंकड़ों का अध्ययन कर रिपोर्ट तैयार की है। अध्ययन के अनुसार करीब 40 प्रतिशत सीटों पर ओबीसी वर्ग के उम्मीदवार विजयी रहे, जबकि सामान्य वर्ग की सीटों पर भी ओबीसी प्रत्याशियों की उल्लेखनीय जीत दर्ज की गई। हालांकि कुछ बड़े नगरीय निकायों में यह आंकड़ा 32 से 33 प्रतिशत के बीच रहा।प्रदेश में ओबीसी परिवारों की संख्या के आधार पर जयपुर, सीकर, जोधपुर, भीलवाड़ा और अलवर जैसे जिलों में सबसे अधिक आरक्षण का लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है। वहीं सलूंबर, प्रतापगढ़, बांसवाड़ा, डूंगरपुर और जैसलमेर जैसे जिलों में ओबीसी परिवारों की संख्या अपेक्षाकृत कम होने के कारण आरक्षण का प्रतिशत भी कम रह सकता है।सूत्रों के अनुसार आयोग ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों को आधार बनाते हुए रिपोर्ट तैयार की है। जिन क्षेत्रों में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति की आबादी अधिक है, वहां ओबीसी को अधिकतम 21 प्रतिशत आरक्षण का पूरा लाभ नहीं मिल पाएगा। ऐसे मामले मेवाड़ और पूर्वी राजस्थान सहित कई जिलों में सामने आ सकते हैं। वहीं कुल आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत से अधिक नहीं रखने की संभावना जताई जा रही है।उल्लेखनीय है कि ओबीसी राजनीतिक प्रतिनिधित्व आयोग का गठन 9 मई 2025 को किया गया था और उसे तीन माह में रिपोर्ट सौंपनी थी, लेकिन कार्यकाल तीन बार बढ़ाने के बाद अब करीब डेढ़ वर्ष पश्चात रिपोर्ट सरकार को सौंपी जा रही है। आयोग ने प्रदेशभर में लगभग 51 हजार कार्मिकों के माध्यम से सर्वे कर अनुमानित ओबीसी आबादी का आकलन किया है।ओबीसी आरक्षण निर्धारण को लेकर रिपोर्ट में हुई देरी के कारण प्रदेश में निकाय और पंचायत चुनाव भी लगातार टलते रहे। राज्य सरकार ने हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में आयोग की रिपोर्ट लंबित होने का हवाला दिया था। अब रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद सरकार तय समयसीमा के भीतर आरक्षण प्रक्रिया पूरी कर चुनाव कार्यक्रम को अंतिम रूप देने की दिशा में आगे बढ़ेगी। सूत्रों के अनुसार नगरीय निकायों के लिए सितंबर के पहले पखवाड़े तथा पंचायत चुनाव अक्टूबर में चरणबद्ध तरीके से कराए जाने की संभावना है।