मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का अहम निर्णय: राज्य सेवा के अधिकारियों के विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई
जयपुर | मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रदेश में संवेदनशील, पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन की नीति को सख्ती से लागू करते हुए राज्य सेवा के अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी अनुशासनात्मक कार्यवाही की है। शासन के उच्च स्तर पर लिए गए निर्णयों के तहत 38 विचाराधीन प्रकरणों का प्रभावी निस्तारण किया गया है।
मुख्यमंत्री शर्मा ने भ्रष्टाचार व लापरवाही पर दो टूक रुख अपनाते हुए, सेवा में रहते हुए अनुशासनहीनता और अनधिकृत अनुपस्थिति के दो मामलों में संबंधित अधिकारियों को सेवा से बर्खास्त एवं पदच्युत करने का निर्णय लिया है।
वहीं, लम्बे समय से लंबित अभियोजन स्वीकृति के प्रकरणों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सात अधिकारियों के विरुद्ध अभियोजन चलाने की स्वीकृति दी गई है। भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम, 2018 की धारा 17-ए के तहत पाँच मामलों में विस्तृत जांच और अनुसंधान की अनुमति प्रदान की गई है।
इसके साथ ही, ग्यारह अधिकारियों के विरुद्ध सीसीए नियम-16 तथा दो अधिकारियों के विरुद्ध सीसीए नियम-17 के अंतर्गत अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उनकी वार्षिक वेतनवृद्धि को संचयी और असंचयी प्रभाव से रोका गया है।
सेवानिवृत्त अधिकारियों पर भी कसा शिकंजा
मुख्यमंत्री कार्यालय ने पारदर्शी प्रशासन की प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाते हुए सेवानिवृत्त अधिकारियों के पुराने प्रकरणों का भी निपटारा किया है। नौ अधिकारियों की पूर्ण या आंशिक पेंशन रोके जाने की कार्यवाही की गई है, वहीं चार सेवानिवृत्त अधिकारियों के विरुद्ध प्रमाणित आरोपों के जांच निष्कर्षों को अनुमोदन प्रदान किया गया है।
साथ ही, एक सेवानिवृत्त भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी के विरुद्ध अखिल भारतीय सेवाएं (अनुशासन एवं अपील) नियम, 1969 की धारा 08 के तहत पेंशन रोकने की सिफारिश भारत सरकार को भेजी गई है।
अन्य अनुशासनात्मक निर्णय
सीसीए नियम-34 के अंतर्गत दो पुनर्विलोकन याचिकाओं को निरस्त करते हुए पूर्व दंड को यथावत रखा गया है। वहीं, दो विभागीय जांच प्रकरणों में संबंधित अधिकारियों को राहत प्रदान की गई है।
मुख्यमंत्री द्वारा लिए गए ये निर्णय राज्य प्रशासन में जवाबदेही, पारदर्शिता और सुशासन की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रहे हैं।